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बाज़ार नियामक सेबी जारी कर सकता है ई कॉमर्स फर्म्स को म्यूचुयल फंड्स ऑनलाइन बेचने के लिए दिशा निर्देश

DREAMSTIME - MUTUAL FUNDS CHOICES ILLUSTRATION

नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार की संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) जो बाजार को नियंत्रित करती है, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर म्यूचुअल फंडों की बिक्री के लिए दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने के कगार पर है।

स्त्रोतों के अनुसार ये नये दिशा निर्देश जनवरी तक आ सकते हैं. फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, व दूसरे अन्य ऑनलाइन बाज़ारों को वित्तीय उत्पादों को बेचने की अनुमति दी जा सकती है जो अभी तक सिर्फ़ ब्रोकर्स और बेंकों का छेत्र था।

इस खबर से जुड़े कुछ लोगों ने बताया की पिछले महीने सेबी प्रमुख यूके सिन्हा ने म्यूचुअल फंडों की लागत संरचना को कम करने के लिए गठित समिति का नेतृत्व कर रहे नंदन नीलेकणि से तथा ई-कॉमर्स कंपनियों जैसे की फ्लिपकार्ट, स्क्रिपबॉक्स, फंड्स इंडिया.कॉम तथा पैसाबाज़ार. कॉम के प्रतिनिधियों से बेंगालुरू में मुलाकात की थी।

SEBI सबसे पहले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर संतुलित और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड की बिक्री करने की अनुमति दे सकता है ताकि यह इस शुरुआत पर ग्राहकों की प्रतिक्रिया का अंदाज़ा लगा सके। अगर ये प्रयोग सफल हो जाता है, तो ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म को और भी वित्तीय उत्पादों को बेचने के लिए नियोजित किया जा सकता है।

ई कॉमर्स कंपनियों द्वारा 0.5 % कमीशन लेने की आशा जताई जा रही है। जब निवेशक सीधे फंड हाउस से म्यूचुअल फंड खरीदते हैं तो उन्हे कोई भी श्ल्क नही अदा करना पड़ता। जब वो तीसरे पक्ष के वितरकों और वित्तीय सलाहकारों के माध्यम से म्यूचुअल फंड खरीदते हैं तब उनपर लगभग 1 प्रतिशत का कमीशन लगाया गया है। यहाँ पर ई-कॉमर्स कंपनियों को वितरकों और वित्तीय सलाहकारों पर बढ़त मिल सकती है।

आधार कार्ड द्वारा .KYC करने की योजना भी लागू की जा सकती है जिसपर सेबी व सेंट्रल बॅंक कई दिनो से विचार कर रहे हैं। विक्रय के ग़लत तरीकों को रोकने के उपायों जिन्हे एजेंट्स व वितरकों के उपर ग्राहकों को उत्पादों की विशेषताओं के बारे में गुमराह करने से रोकने के लिए लगाया जाता है भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से फंड की बिक्री पर लागू नही होंगे।

ये दिशा निर्देश एक ऐसे समय आ रहे हैं जब ई कॉमर्स भारत में जबरदस्त प्रगती कर रहा है व महानगरों के साथ साथ छोटे शहरों से भी लोग तेजी से सभी श्रेणियों के उत्पादों को ऑनलाइन खरीद रहे हैं। दिल्ली हाइ कोर्ट के ई कॉमर्स वेबसाइट्स के विरुध कोई भी अंतरिम आदेश पारित करने से मना करने को शामिल करते हुए ये रीपोर्ट ई कॉमर्स ब्रांड्स के लिए एक बेहतर क़ानूनी वातावरण तैयार करने के पक्ष में लगती है।

ये सब इंटरनेट के बढ़ते हुए फैलाव व जागरूकता की वजह से है व ये फंड हाऊसेस को छोटे शहरों व कस्बों के बाज़ार में अपनी पैठ बनाने में मदद करेगा।

इस्तेमाल की गई छवि का स्त्रोत : murraycoulterandassociates

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन