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लंदन के हायपरलोकल डिलिवरी अपस्टार्ट Deliveroo को एशियाई बाज़ारों में विस्तार के लिए मिला $100 मिलियन का निवेश

हायपरलोकल मॉडल से रेस्त्रां व लोकल बाज़ारों के लिए डिलिवरी करने वाले UK के स्टार्टप Deliveroo को DST Global व Greenoaks Capital द्वारा चलाये गये डी सत्र में पूर्व निवेशकों Accel Partners, Hummingbird Ventures व Index Ventures की हिस्सेदारी में $100 मिलियन का निवेश मिला है।

इस नये निवेश के साथ कंपनी यूरोपी बाज़ारों से बाहर आकर दुबई, हॉग-कॉग, सिंगापुर, मेलबर्न और सिडनी में विस्तार करेगी।

इसके साथ ही कंपनी का मुख्य फ़ोकस एशिया पर है, जो कि अंत में भारत पर आकर टिक रहा है। ज़ाहिर सी बात है कि ऐसी सेवाओं के लिये भारत से बड़ा बाज़ार एशिया में उपलब्ध नहीं है और यहां पर भी डिलिवरी सेगमेंट बहुत ही फैला हुआ है।

इस विस्तार के बाद Deliveroo 12 देशों के 50 शहरों में उपस्थित होगा और अपना विस्तार आगे भी करती रहेगी। Uber के बाद Deliveroo भारत में विदेशी कंपनी के भारत में प्रवेश और बड़ी कैश बैकिंग के कारण विस्तार की सफलता का उदाहरण पेश कर सकती है। इनके कैश जोड़ने के प्रयास से तो यही लगता है।

अभी 5,000 रेस्त्रां के लिये कार्य कर रही Deliveroo को इससे पहले सी सत्र में $70 मिलियन का निवेश मिला है। इनको शुरवात से इन्हें कुल $200 मिलियन का निवेश प्राप्त हो चुका जो कि मुख्यतः DST Global जैसे बड़े फ़र्मों के कारण है।

विल शू व ग्रेग ओरलोस्की द्वारा स्थापित यह कंपनी रेस्त्रां के लिये भोजन का प्रचार, सेल व घर तक डिलिवरी करती है।

कंपनी वेब व मोबाइल उपभगताओं को रेस्त्रां के टैबलेट-बेस पॉइंट-ऑफ़-सेल ऑर्डर मैनेजमेंट टर्मिनल व डिलिवरी ड्राइवर स्मार्टफ़ोन सॉफ़्टवेयर द्वारा कंपनी के लॉजिस्टिक ऑप्टिमाइज़ेशन ऐल्गॉरिदम के प्रयोग से खरीद व डिलिवरी को ऑपटिमाइज़ कर के दे रही है।

यूरोप में Deliveroo एकलौती ऐसी कंपनी नहीं है। इनका सीधा मुकाबला जर्मनी की इंटरनेट कंपनी Rocket Internet द्वारा बैक की हुई Take Eat Easy से है। इसके अलावा यह UK की Just Eat व बर्लिन की Delivery Hero व अन्य से प्रतिद्वंद कर रहे हैं।

भारत में FoodPanda, Swiggy, Yumist, TinyOwl, HolaChef, DeliveryChef, Just Eat, Tasty Khana, आदि जैसे कई डिलिवरी स्टार्टप कार्य कर रहे हैं, और उन्हें वेचर कैपिटल फ़र्मों से बहुत बड़ी बैकिग मिली है। पर इन सभी में किये गये निवेश को मिला भी लिया जाये तो भी यह Deliveroo में किये गये निवेश का मुकाबला नहीं कर सकते।

भले ही हम किसी को भी सिर्फ़ निवेश के आधार पर जज नहीं कर सकते हैं, पर यह एक बहुत ही बड़ा फ़ैक्टर होता है। अब यह देखने वाली बात है कि Deliveroo या कोई भी विदेशी स्टार्टप भारत में प्रवेश कर कितना लाभ कमा पाता है।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन