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माइक्रोसॉफ्ट बैंडविड्थ की कमी दूर करने वाले स्टार्टअप्स की करेगा मदद, अपने इंटरनेट प्रोजेक्ट के लिए किया वाराणसी का चयन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिलिकॉन यात्रा के दौरान माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नाडेला ने देश के एक अरब से भी ज्यादा लोगो क लिए देश के अंदर वाई फ़ाईहॉटस्पॉट केंद्र स्थापित करने की अपनी कंपनी की विस्तृत योजना के बारे मैं बात की थी, और ये भी एक संयोग ही कहा जायेगा की रेडमुंड ने इस परियोजना के पहलेचरण के लिए मोदी के निर्वाचन छेत्र वाराणसी को ही चुना है।

वाराणसी, जिसे अक्सर भारत की धार्मिक राजधानी कहा जाता है, और जो भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्वाचन छेत्र भी है , में माइक्रोसॉफ्ट की इस परियोजना कापरिक्षण करना कंपनी की बजाय भारत सरकार का फैसला लगता है .

द हिन्दू मैं प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार कंपनी परियोजना के एक हिस्से के रूप मैं स्थानीय उद्यमियों को ऐसे उपकरण बनाने के लिए प्रेरित करेगी जिससे भारत कीबैंडविड्थ की कमी को दूर किया जा सके , तथा उसके लिए पूंजी भी उपलब्ध कराएगी। कंपनी स्थानीय उद्यमियों द्वारा विकसित उपकरणों को संचालित करने के लिएनिष्क्रिय टेलीविज़न प्रसारण स्पेक्ट्रम का प्रयोग करेगी।

माइक्रोसॉफ्ट की भारत मैं ये अकेली परियोजना नहीं है इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट गावों में कम लगत पर इंटरनेट सेवा प्रदान  करने के  उद्देशय के साथ एक औरपरियोजना पर भी काम कर रहा है . ये दूसरी परियोजना आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के एक सरकारी स्कूल से शुरू की जा रही है।

माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नाडेला के अनुसार :

हम इस तकनीकी परियोजना को तकनीकी जोखिम के साथ सिर्फ ये सोच के प्रारभ कर रहे हैं ताकि ये दिखा सके की ये तकनीक काम कर सकती है और मौजूदा आर्थिकपरिवेश मैं इसे लागु भी किया जा सकता है . परन्तु मैं ये आशा माइक्रोसॉफ्ट से नहीं बल्कि स्थानीय उद्यमियों से करता हूँ की वो आगे आएं और इस परियोजना मैंसहयोग करें।

मैं स्थानीय उद्यमियों के सम्मिलित होने पर इसलिए जोर दे रहा हूँ क्यूंकि मुझे ऐसा लगता है की जब तक आपके पास ऐसा कोई स्थायी मॉडल नहीं है जिस पर स्थानीयकंपनियां काम कर सके कोई भी बड़ी परियोजना सही मायनो मैं काम नहीं कर सकती।

हालाँकि माइक्रोसॉफ्ट भारत में आकर्षक और बड़े पैमाने पर इंटरनेट प्रदान करने का मौका देखने वाली अकेली कंपनी नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट के अलावा कई अन्यवैश्विक तकनिकी दिग्गज कंपनियाँ भी कम लागत पर इंटरनेट प्रदान करने की योजना बना रही हैं। इस महीने की शुरआत में ही गूगल ने अपने प्रोजेक्ट लून के लिए भारतसरकार से स्वीकृति प्राप्त की है  जिसका  लक्षयहवा मैं तैरते हुए गुब्बारों के द्वारा इंटरनेट प्रदान करने का है . इस परियोजना का परीक्षण अफ्रीका में पहले ही किया जा चुका है।

फेसबुक ने भी हाल मैं ही ये घोषणा की है की वो  अगले साल एक फ़्रांसिसी कंपनी उतेलसेट के सहयोग से एक उपग्रह प्रक्षेपित करेगा जिससे  कम लगत वाली इंटरनेटसेवा प्रदान की जा सकेगी।

इसके साथ ही फेसबुक ने भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के साथ ग्रामीण भारत मैं इंटरनेट हॉटस्पॉट प्रदान करने का अनुबंध होने की भी घोषणा की है।

माइक्रोसॉफ्ट की आने वाली परियोजनाओं के बारे मैं बोलते हुए सत्या नाडेला ने कहा की वो हो रहे परिवर्तन की दर और उसे स्वीकार करने को ले कर बहुत  आशावान हैं. साथ ही वो ही भारत के इ कॉमर्स से बहुत प्रभावित हैं जो अब सिर्फ स्टार्ट-अप्स  न हो कर मेगा स्केल्स बन चुके हैं।

उन्होंने ये भी कहा की वो भारत मैं नवाचार की संस्कृति से भी प्रभावित हैं तथा भारत के सार्वजनिक और निजी छेत्रों में हो रहे व्यापक आर्थिक विस्तार के कारण वो भारतको ले के बहुत आशावादी भी हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन