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Ola व Uber जैसे टैक्सी चालकों को नियंत्रित करने के लिये सरकार ने बनाये नए नियम

महीनों की कानूनी कार्यवाही के बाद लगता है कि आखिरकार Ola और Uber जैसों को राहत मिलेगी। भारतीय सरकार ने अब कैब चलाने वाली कंपनियों के लिये नए नियम बनाये हैं, और उन्हैं टैक्सी सेवा की जगह ऑन-डिमांड तकनीक नियंत्रित परिवहन उपलब्ध कराने वाली सेवा का नाम दिया है।

परिवहन मंत्रालय ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने बोला है कि यह सेवाएं कॉल सेंटरों के साथ चलायी जायें और पिछले सप्ताह लाये गये छ: पन्नो के एमीशन नियमों का पालन करें।

फिर भी, यह राज्य पर निर्भर करता है कि वह इन नियमों को मानें या नहीं। यह कैब कंपनियां कहती रही हैं कि वह टैक्सी कंपनियां नहीं हैं, बल्कि IT कंपनियां हैं जो चालक और उपभोगता को जोड़ती हैं।

नियमों के मुताबिक यह कंपनियां अपना कोई वाहन नहीं खरीद सकतीं, कोई चालक को काम पर नहीं रख सकतीं और अपने आप को टैक्सी कंपनी नहीं बुला सकतीं अगर वह टैक्सी कंपनी के रूप में पंजिकृत नही हैं। साथ ही, हर टैक्सी ऑपरेटरों को एक फ़्लीट साइज़, ऑफशियल स्पेस व सभी टैक्सियों के लिये एक पार्किंग स्पेस भी बना के रखना पड़ेगा।

साथ ही, इसमें चालकों की गहरी जांच का भी प्रावधान है, और यदि कोई व्यक्ति भारत के किसी नियम के तहत दोशी पाया जाता है तो उसे चालक नहीं बनने दिया जाएगा।

यह नियम Ola व Uber जैसों के लिये राहत के तौर पर आए हैं, हालाकि इनके कारण कंपनियों को ऑपरेशन लेवल पर दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। जैसे, एक प्रावधान के अंतर्गत चालक इन मंचों पर कभी भी लॉग-इन व लॉग-आउट कर सकता है। साथ ही वह कई मंचों पर भी सक्रीय रह सकते हैं।

Ola के हमको भेजे गये बयान में उन्होंने कहा:

हम सरकार के नियमों को लेकर उत्साहित हैं। यह कदम उस ईकोसिस्टम व उन स्टेकहोल्डरों के लिये महत्वपूर्ण है जिन्हें हमारी जैसे तकनीकी मंचों ने बनाया है। हम एक बिलियन लोगों के लिये यातायात उपलब्ध कराने के लिये भारत सरकार के साथ इन नियमों से चलने के लिये कार्यरत हैं।

साथ ही, कंपनियां चालकों को काम करने की न्यूनतम अवधी नहीं बता सकतीं, लेकिन सुरक्षित वाहन चलाने के लिये अधिकतम सुरक्षित अवधि का उन्हें पालन करना होगा। यह कोई परेशानी की बात नहीं है, क्योंकि Ola व Uber में न्यूनतम अवधि का कोई नियम वहीं है। साथ ही वह अपने चालकों को एक मंच से बाधित भी नहीं करते।

दिसंबर 2014 से कई राज्य कैब उपलब्ध करवाने वालों को बैन करने व उन्हैं टैक्सी सेवा के रूप में पिजिकरण कराने पर मजबूर कर रहे थे। साथ ही नई दिल्ली जैसी जगह पर डीज़ल वाहनों के प्रयोग पर भी दुविधा थी, जहां सारी स्थानीय टैक्सियां CNG से चलती हैं।

कर्नाटक सरकार के साथ अन्य सरकारें पहले ही राज्य को ध्यान में रख कर अपनी पॉलिसी बना रही हैं, जो वह अगले सप्ताह तक लांच करेंगी।

हम सभी स्टेकहोल्डरों व कानूनी डिपार्टमेंटों से बात कर रहे हैं, और हमारा फ़ाइनल ड्राफ़्ट अगले सप्ताह तक आ जाएगा।

बेंगलुरु में राज्य परिवहन मंत्रालय, परिवहन व सचिव के एडिशनल कमिश्नर एच.जी. कुमार ने कहा।

महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही अपना टैक्सी नियम 2015 शुरू कर दिया है, जिसके अनुसार टैक्सी कंपनियों को कम-से-कम 1000 व अधिकतम 4000 टैक्सियां रखने की अनुमती है। अधिकतम लिमिट के साथ व्यापारों को बढ़ने में दिक्कत होगी।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन