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भारत ने सरकारी दफ्तरों में Gmail, Yahoo के इस्तेमाल पर लगाया प्रतिबन्ध

सरकारी अधिकारीयों द्वारा दफ्तर मैं इंर्टरनेट के उपयोग को सीमित करके रखने की अपनी मुहीम के मद्देनज़र, मोदी सरकार ने एक नए अध्यादेश के तहत दफ्तरों मैं third-party इ-मेल वेबसाइट जैसे Gmail, Yahoo के इस्तेमाल पर अब पूर्णतः प्रतिबन्ध लगा दिया है ।

इस नए आदेश के अंतर्गत, अब सभी अफसर सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र द्वारा दी गयी इ-मेल सेवाओं का ही इस्तेमाल कर सकेंगे । यह 18 फरवरी को मोदी सरकार द्वारा जारी किए गए जुड़वां सूचनाऍ , ‘भारत सरकार की ई-मेल नीति‘ और ‘भारत सरकार की सूचना प्रौद्योगिकी संसाधनों के उपयोग पर नीति‘ का एक हिस्सा है।

इन नयी नीतियों के तहत, अब सरकार अफसरों द्वारा खोले गए प्रत्येक इ-मेल पर नज़र रखेगी । इसके अलावा अपने अफसरों की कार्यक्षमता को कम करने वाले हर प्रकार के इ-मेल को सरकार मनचाहे तरीके से हटा भी सकती है ।

इस आदेश के अंदर सभी केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों को शामिल किया गया । इनके अलावा, राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वह अफसर, जो राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र द्वारा दी गयी इ-मेल सेवाओं का उपयोग लरते हैं या करेंगे, उनहे भी इस आदेश की सीमा मैं लिया गया है ।

कहा जा रहा है की एडवर्ड स्नोडेन द्वारा किये गए हाल ही खुलासों मैं अमेरिका के द्वारा की गयी जासूसी प्रथाएं, भारतीय सरकार के इस कदम का कारण हो सकती है ।

वर्तमान बजटीय सत्र के अंत तक, पांच लाख अधिकारियों को एनआईसी की मुख्य सेवा से जोड़ने का सरकार का प्रयास है । इसके लिए सरकार ने बजट के अंदर १०० करोड़ रुपयों का प्रावधान किया है ।

इस्तेमाल की गयी छवि क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के अंतर्गत, यहाँ से ली गयी है : Cairo  | इस लेख को अंग्रेजी मैं पढ़ने के लिए, यहां क्लिक करें  |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन